काव्य

कविताएँ

मुक्तछंद, दोहे और छंदबद्ध रचनाएँ — उनकी अपनी लेखनी से।

काव्य

उनकी अपनी रचनाएँ

गीत

ममता की मानसरोवर माँ

मानस की चौपाई हैं या, अतीत लिखी कथाएं हैंतुलसी आंगन बिरवा हैं माँ, या वेद की ऋचाएं हैं।
26 पंक्तियाँ
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गीत

मैं ही पूर्ण संसार हूँ

मैं जीना चाहूँ जीवनमैं समेट रहा अस्तित्व
30 पंक्तियाँ
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दोहा

काशी विश्वनाथ की वंदना

द्विरद अलंकृत चर्म पट, नीलकण्ठ त्रिपुरारिगिरि रुप्याभ वर्ण ऋत, अभ्यंकर कामारि
14 पंक्तियाँ
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कविता

मैं शिव में, शिव मुझमें

चेतस तत्व ब्रह्म का हूँ मैं, मैं कालजयी अनुयायीकितनी आयु बची है मेरी, आत्म निरूपण सुखदायी
9 पंक्तियाँ
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गीत

मातृभूमि

द्युलोक की प्रत्युष कांति या विभावरी का मणि वलयझंकृत करती अत्युक्त वीणा या हँसध्वनि की लय
42 पंक्तियाँ
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स्रोत — “प्रज्ञान विश्वम्”, रचनाकार भारत फाउंडेशन, कोलकाता।

काव्य संग्रह

14 काव्य कृतियाँ

सुर तरंगिणी
सुर तरंगिणीसुरेश चौधरी “इन्दु”
सुर तरंगिणी
तिमिर ढलेगा
तिमिर ढलेगासुरेश चौधरी “इन्दु”
तिमिर ढलेगा
बुलबुले-सी ज़िन्दगी
बुलबुले-सी ज़िन्दगीसुरेश चौधरी “इन्दु”
बुलबुले-सी ज़िन्दगी
कुछ माणिक कुछ मोती
कुछ माणिक कुछ मोतीसुरेश चौधरी “इन्दु”
कुछ माणिक कुछ मोती
शून्य से शून्य तक
शून्य से शून्य तकसुरेश चौधरी “इन्दु”
शून्य से शून्य तक
दोहञ्जली
दोहञ्जलीसुरेश चौधरी “इन्दु”
दोहञ्जली
भारतीय काव्य संहिता
भारतीय काव्य संहितासुरेश चौधरी “इन्दु”
भारतीय काव्य संहिता
आसमान को छू लें
आसमान को छू लेंसुरेश चौधरी “इन्दु”
आसमान को छू लें
बूँद बूँद सागर
बूँद बूँद सागरसुरेश चौधरी “इन्दु”
बूँद बूँद सागर
छन्द साधना
छन्द साधनासुरेश चौधरी “इन्दु”
छन्द साधना
इन्दु प्रभा
इन्दु प्रभासुरेश चौधरी “इन्दु”
इन्दु प्रभा
माँ
माँसुरेश चौधरी “इन्दु”
माँ
मैं जीवन दंड-विधान हूँ
मैं जीवन दंड-विधान हूँसुरेश चौधरी “इन्दु”
मैं जीवन दंड-विधान हूँ
शब्द साधना
शब्द साधनासुरेश चौधरी “इन्दु”
शब्द साधना
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