सुरेश चौधरी “इन्दु” अपने अध्ययन-कक्ष में
कवि दार्शनिक चिंतक लेखक

सुरेश चौधरी“इन्दु”

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मुख्य आकर्षण

एक दृष्टि में

एक परिचय

शब्द, साधना और समर्पण

सुरेश चौधरी “इन्दु”

सुरेश चौधरी “इन्दु” — कोलकाता में रहने वाले हिन्दी कवि, लेखक, दार्शनिक एवं अध्यात्म-चिंतक हैं। जन्म 14 जुलाई 1952 को जमशेदपुर, झारखंड में; माता स्व. श्रीमती दुर्गावती चौधरी एवं पिता स्व. श्री भोलाराम चौधरी।

जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज से भौतिकी, रसायन एवं गणित में स्नातक करने के पश्चात् उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी पूर्ण की। ऊषा एलॉयज़ एंड स्टील्स तथा बिहार एलॉय स्टील्स में वित्त एवं वाणिज्य का दायित्व सँभालने के बाद, 1983 से 2008 के बीच उन्होंने बड़ौदा, गोधरा, मेघनगर, जमशेदपुर, चांडिल, बरबिल और कोलकाता में अठारह इस्पात औद्योगिक इकाइयों की स्थापना एवं संवर्धन किया।

सन् 2006 की एक गंभीर बीमारी उनके जीवन का मोड़ बनी। अंतर्मुखी चिंतन की उस यात्रा के बाद, 2011 से उन्होंने स्वयं को पूर्णतः साहित्य-साधना को समर्पित कर दिया। उनका लेखन सनातन दर्शन, मनुष्य की आध्यात्मिक यात्रा, सत्य, करुणा और आत्म-ज्ञान के इर्द-गिर्द घूमता है।

उनकी सबसे विशिष्ट देन है संस्कृत ग्रंथों का हिन्दी छंदबद्ध अनुवाद — जिसमें मूल रचना का छंद यथावत् बनाए रखा जाता है। ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, ऐतरेय, तैत्तिरीय एवं श्वेताश्वतर उपनिषदों सहित चालीस से अधिक ग्रंथ उनके नाम हैं। नील द्वीप पर संध्या तर्पण (श्रीकृष्ण-जीवन पर महाकाव्य), चित्तौड़ के पंद्रह सौ वर्षों का महाकाव्य तथा 108 मानकों में राम-कथा — सृजन अब भी अनवरत है।

सन् 2019 में उन्होंने रचनाकार की स्थापना की — शुक्तिका इंडिया फाउंडेशन की सांस्कृतिक पहल, जो आज इक्कीस देशों तक फैली एक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था है। प्रत्येक रविवार प्रसारित होने वाला ज्ञानगंगा तथा गीता-कार्यशालाएँ इसी संकल्प का विस्तार हैं।

जन्म
14 जुलाई 1952जमशेदपुर, झारखंड
कर्मभूमि
कोलकातापश्चिम बंगाल
विश्व कीर्तिमान
1000 भक्ति-गीत1100 दिनों में रचित
मानद उपाधि
विद्या वाचस्पतिवैदिक हिन्दी साहित्य हेतु

सम्मान — पश्चिम बंगाल के महामहिम राज्यपाल, अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन एवं इंस्टीट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया (ICAI) द्वारा विशेष अभिनंदन।

प्रशंसा पत्र

उन्हें जिन्होंने निकट से जाना

लक्ष्मीनारायण भाला ‘लक्खीदा’
लक्ष्मीनारायण भाला ‘लक्खीदा’
वरिष्ठ चिंतक एवं लेखक

सुरेश जी के परिचय का एक वाक्यीय निचोड़ यही है कि असामान्य व्यक्तित्व के सामान्य व्यक्ति से मिलना हो तो चलो सुरेश जी से मिल आते हैं। एक कवि के नाते ११४५ दिनों में १००० भजनों की रचना करने का वैश्विक कीर्तिमान सुरेश जी ने स्थापित किया है।

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सोमा बंदोपाध्याय
सोमा बंदोपाध्याय
कुलपति — बाबा साहब अंबेडकर विश्वविद्यालय

प्रस्तुत अनुवाद में मूल भावना को सम्पूर्ण रूप से आत्मसात कर सुरेश चौधरी जी ने हिन्दी में जो अभिव्यक्ति दी है वह गंभीर चिंतन और अथक प्रयास का सराहनीय उदाहरण है।

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डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र
डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र
सुप्रसिद्ध गीतकार एवं साहित्यकार

संस्कृत वह श्रीयंत्र है, जिसका मूल्य जितना हम समझेंगे, उतना हम स्वयं मूल्यवान बनेंगे। निश्चय ही, चौधरी जी धन्यवाद के पात्र हैं कि उन्होंने पूरी सतर्कता से यह रचना की है।

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सुधा अहलुवालिया
सुधा अहलुवालिया
कवयित्री

आप समाज की विविध समस्याओं के निदान एवं उसके उत्कर्ष के प्रति सदैव सजग रहते जान पड़ते हैं। आपके द्वारा पृथक-पृथक विषयों पर लिखित आलेख वास्तव में सराहनीय हैं।

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चंदा प्रह्लादका
चंदा प्रह्लादका
वरिष्ठ साहित्यकार एवं विचारक

वरिष्ठ साहित्यकार, विचारक, चिंतक एवं अर्थशास्त्री आ. सुरेश चौधरी जी की व्यक्तित्व की विशेषता के बारे में जितना कहूँ कम होगा। उनकी उत्कृष्ट लेखनी अनुपम सृजन शब्दों की सीमा से परे है।

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शशि लाहोटी
शशि लाहोटी
कवयित्री एवं लेखिका

आपने 1016 दिनों में एक हजार भजन लिखकर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है, जो इंटरनेशनल बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है। कई पुस्तकें अभी प्रकाशनाधीन हैं।

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